रवि कुमार
तब से स्मार्टफोन आये हैं अगर देखा जाये
तो जिंदगी आसान भी हो गई है।हमारी
जिंदगी में एक दोस्त का किरदार भी निभाता
हैं आज 80% लोगो के पास स्मार्टफोन
मिलेगे 70% लोगो को सेल्फी लेने का शौक
होता हैं आजआज स्मार्टफोन में अपनों के
बीच में ही दूरियां बनाकररखी है आज
अपने के होते हुए भी आज हम Facebook
और WhatsApp पर दूसरों को खोजते है।
अपनों के होते हुए भी आज मोबाइल हमारे
बीच आकर हमे अपनो से अलग कर दिया हैं
हम परिवार के साथ समय नहीं देते मोबाइल के
साथ समय देते हैं मोबाइल चलाना ठीक हैं
गलत नहीं हैं लेकिन ज्यादा समय मोबाइल पर
बिताना अपनो को छोड़कर यह गलत बात हैं

तब से स्मार्टफोन आये हैं अगर देखा जाये
तो जिंदगी आसान भी हो गई है।हमारी
जिंदगी में एक दोस्त का किरदार भी निभाता
हैं आज 80% लोगो के पास स्मार्टफोन
मिलेगे 70% लोगो को सेल्फी लेने का शौक
होता हैं आजआज स्मार्टफोन में अपनों के
बीच में ही दूरियां बनाकररखी है आज
अपने के होते हुए भी आज हम Facebook
और WhatsApp पर दूसरों को खोजते है।
अपनों के होते हुए भी आज मोबाइल हमारे
बीच आकर हमे अपनो से अलग कर दिया हैं
हम परिवार के साथ समय नहीं देते मोबाइल के
साथ समय देते हैं मोबाइल चलाना ठीक हैं
गलत नहीं हैं लेकिन ज्यादा समय मोबाइल पर
बिताना अपनो को छोड़कर यह गलत बात हैं
ऐसा होता कि सड़क पर चलते हुए मोबाइल
चलाते है लोग जिस से दुर्घटना की संभावना
रहती है। कभी कभी दुर्घटना हो भी जाती है।
गलती हमारी होती हैं फिर हम दोष दूसरों
देते हैं हमारे परिवार वालो को दुख होता हैं
सोचे अपने आप से सवाल करे कि मैंने 24
घंटों मे से कितने घंटे मोबाइल पर गुजारे
हैं मुझे इस से क्या मिला क्या लाभ हुआ
अपना समय मोबाइल मे न देकर सही जगह
दे
यदि आपका कोइ सवाल हो तो कमेंट मे पूछ
सकते हैं या फिर आपकी कुछ राय हो तो शेयर
कर सकते हैं
nice
जवाब देंहटाएंAchha btaya apne
जवाब देंहटाएंSuper post
जवाब देंहटाएं